मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री कैसे होती है — इंदौर और भोपाल के लिए पूरी जानकारी
जाँच की तारीख 17 सितम्बर 2026 · स्रोत: SAMPADA 2.0, MP IGR
पहले यह समझिए कि शुल्क किस रकम पर लगता है
रजिस्ट्री का शुल्क उस रकम पर लगता है जो दो में से ज़्यादा हो — या तो वह कीमत जो दस्तावेज़ में लिखी है, या फिर उस लोकेशन की अधिसूचित कलेक्टर गाइडलाइन दर से निकला मूल्य। दस्तावेज़ में कम कीमत लिखने से शुल्क कम नहीं होता।
अगर पंजीयन अधिकारी को लगे कि कीमत कम बताई गई है, तो दस्तावेज़ भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 47-क के तहत कलेक्टर को भेजा जा सकता है। कलेक्टर बाज़ार मूल्य तय करके बची हुई रकम माँग सकते हैं। इसीलिए सही आँकड़े से शुरुआत करना सस्ता पड़ता है।
गाइडलाइन दर क्या है
हर ज़िले के लिए हर साल एक बाज़ार मूल्य गाइडलाइन अधिसूचित होती है, जिसे आम बोलचाल में कलेक्टर गाइडलाइन कहते हैं। इसमें लोकेशन-वार दरें होती हैं — भूखंड की अलग, बने हुए भवन की अलग, कृषि भूमि की अलग। भूखंड और भवन की दरें प्रति वर्ग मीटर होती हैं, कृषि भूमि की प्रति हेक्टेयर।
नई गाइडलाइन हर साल 1 अप्रैल से लागू होती है। इस साइट पर इंदौर और भोपाल की 2026-27 की अधिसूचित दरें हैं — इंदौर की 4,592 लोकेशन और भोपाल की 2,179।
विक्रय पत्र पर कौन-कौन से शुल्क लगते हैं
ज़्यादातर वेबसाइटें कहती हैं कि मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री पर 10.5% लगता है। विभाग की अपनी सूची ऐसा नहीं कहती। SAMPADA 2.0 पर "विक्रय / विक्रय का समानुदेशन" के शुल्क विवरण में पाँच मद हैं, और वे मिलकर 12.5% बनते हैं।
| शासकीय स्टाम्प शुल्क | 5% |
| नगरीय निकाय शुल्क | 3% |
| जनपद शुल्क | 1% |
| उपकर | शासकीय स्टाम्प शुल्क का 10% (यानी 0.5%) |
| पंजीयन शुल्क | 3% |
| कुल | 12.5% |
पंजीयन शुल्क कम से कम ₹1,000 लगता है, चाहे रकम कितनी भी छोटी हो। स्थानीय निकाय वाले मद उप-पंजीयक कार्यालय संपत्ति के क्षेत्राधिकार के हिसाब से लगाता है।
महिला के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर छूट
अगर दस्तावेज़ सिर्फ़ महिला या महिलाओं के नाम पर है, तो पंजीयन शुल्क 3% की जगह 1% लगता है। स्टाम्प शुल्क में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। पुरुष के साथ संयुक्त नाम पर यह छूट नहीं मिलती — पूरा दस्तावेज़ महिला के नाम होना चाहिए।
SAMPADA की गणना में यह विकल्प "सभी खरीदार महिलाएँ?" के नाम से मिलता है।
किरायानामे पर कितना स्टाम्प
ग्यारह महीने का किरायानामा — जो सबसे आम है — एक साल से कम की अवधि में आता है। उस पर स्टाम्प शुल्क तय ₹500 है, किराया चाहे जितना हो, और पंजीयन वैकल्पिक है। अगर आप उसे पंजीबद्ध कराते हैं तो पंजीयन शुल्क स्टाम्प शुल्क का तीन-चौथाई होता है, पर कम से कम ₹1,000 — इसलिए व्यवहार में ₹1,000 ही लगता है।
एक साल या उससे ज़्यादा के पट्टे पर पंजीयन अनिवार्य है और स्टाम्प शुल्क अवधि के हिसाब से बढ़ता है।
रजिस्ट्री से पहले क्या-क्या तैयार रखें
दोनों पक्षों के आधार और पैन, संपत्ति के पुराने दस्तावेज़ और नामांतरण की नक़ल, गाइडलाइन के हिसाब से निकाला गया मूल्यांकन, और ई-स्टाम्प। SAMPADA 2.0 पर ई-केवाईसी आधार ओटीपी या वीडियो से होती है, और स्लॉट वहीं से लिया जाता है।
पचास लाख से ऊपर की संपत्ति पर खरीदार को आयकर अधिनियम के तहत टीडीएस काटना होता है। यह रजिस्ट्री शुल्क से अलग है और इसकी शर्तें incometax.gov.in पर देखिए।
स्रोत
- SAMPADA 2.0 — स्टाम्प शुल्क/पंजीयन शुल्क की गणना
- MP IGR — स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क चार्ट (09 सितम्बर 2025)
- SAMPADA 2.0 — संपत्ति मूल्यांकन
- पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग, मध्य प्रदेश
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