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किरायानामे पर कितना स्टाम्प लगेगा

सबसे आम किरायानामा ग्यारह महीने का होता है। विभाग की सूची में वह "एक साल से कम" वाली पंक्ति में आता है — उस पर स्टाम्प शुल्क तय ₹500 है, किराया चाहे जितना हो, और पंजीयन वैकल्पिक है।

स्टाम्प शुल्क ₹500
पंजीयन शुल्क ₹1,000
कुल देय ₹1,500

पंजीयन वैकल्पिक है

पंजीयन शुल्क स्टाम्प शुल्क का तीन-चौथाई होता है, पर कम से कम ₹1,000। इसीलिए ग्यारह महीने का किरायानामा पंजीबद्ध कराने पर ₹375 नहीं, ₹1,000 लगता है।

अवधि के हिसाब से स्टाम्प शुल्क
किरायानामे की अवधि स्टाम्प शुल्क न्यूनतम पंजीयन
11 महीने (एक साल से कम) ₹500 ₹500 पंजीयन वैकल्पिक है
1 से 5 साल 0.1% ₹500 पंजीयन अनिवार्य है
5 से 10 साल 0.5% ₹500 पंजीयन अनिवार्य है
10 से 20 साल 1% ₹500 पंजीयन अनिवार्य है
20 से 30 साल 2% ₹500 पंजीयन अनिवार्य है

स्रोत: MP IGR शुल्क चार्ट (09.09.2025), पंक्ति 74–78। पंजीयन शुल्क हर पंक्ति में स्टाम्प शुल्क का 3/4, न्यूनतम ₹1,000।

किरायानामा क्या है

किरायानामा मकान-मालिक और किरायेदार के बीच का लिखित करार है — किराया कितना, कब तक, जमा राशि कितनी, और कौन क्या मरम्मत कराएगा। विभाग की सूची में यह "पट्टा" (lease) की श्रेणी में आता है, इसलिए इस पर स्टाम्प शुल्क लगता है।

ग्यारह महीने का ही क्यों? क्योंकि एक साल से कम अवधि पर पंजीयन अनिवार्य नहीं है। एक साल या उससे ज़्यादा का करार पंजीबद्ध कराना पड़ता है, और स्टाम्प भी अवधि के हिसाब से बढ़ जाता है। यही वजह है कि पूरे देश में किरायानामा ग्यारह महीने का बनता है।

किरायानामा कैसे बनता है

  1. तय कीजिए — किराया, अवधि, जमा राशि (सिक्योरिटी), बिजली-पानी का बिल कौन भरेगा, और नोटिस की अवधि।
  2. दोनों पक्षों के आधार, और मकान का पता व संपत्ति की पहचान तैयार रखिए।
  3. ई-स्टाम्प SAMPADA 2.0 से बनवाइए — ग्यारह महीने के लिए तय ₹500 का।
  4. करार उसी स्टाम्प पर छपवाइए, दोनों पक्ष और दो गवाह हस्ताक्षर करें।
  5. पंजीयन कराना हो — बैंक, GST या पते के प्रमाण के लिए अक्सर माँगा जाता है — तो उप-पंजीयक कार्यालय में स्लॉट लेकर कराइए।

GST रजिस्ट्रेशन के लिए किरायानामा

कारोबार का पता किराये की जगह पर हो, तो GST रजिस्ट्रेशन में जगह के प्रमाण के तौर पर किरायानामा लगता है, साथ में मकान-मालिक का बिजली बिल या संपत्ति कर रसीद। कई मामलों में पंजीबद्ध किरायानामा माँगा जाता है — तब स्टाम्प ₹500 के ऊपर पंजीयन शुल्क ₹1,000 और लगेगा। अपनी ज़रूरत पहले अपने कर सलाहकार से पक्की कर लीजिए; GST की शर्तें हमारा विषय नहीं हैं।

किरायानामे में क्या-क्या लिखा होना चाहिए

  • दोनों पक्षों के पूरे नाम, पते और पहचान
  • संपत्ति का पूरा पता और जो हिस्सा किराये पर है
  • मासिक किराया, बढ़ोतरी की शर्त, और भुगतान की तारीख़
  • जमा राशि और वह कब-कैसे लौटेगी
  • अवधि, और दोनों तरफ़ से नोटिस की शर्त
  • बिजली, पानी, रख-रखाव और मरम्मत किसकी ज़िम्मेदारी
  • दो गवाहों के हस्ताक्षर

यह सरकारी वेबसाइट नहीं है

Registry99 एक निजी वेबसाइट है। हम पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग नहीं हैं, न हमारा उससे कोई संबंध है। हम न स्लॉट बुक कर सकते हैं, न ई-स्टाम्प जारी कर सकते हैं, न दस्तावेज़ पंजीबद्ध कर सकते हैं। यहाँ दिए आँकड़े विभाग के प्रकाशित स्रोतों से लिए गए हैं और आपकी जानकारी के लिए हैं। भुगतान से पहले SAMPADA 2.0 या उप-पंजीयक कार्यालय से रकम की पुष्टि ज़रूर कीजिए।

आम सवाल

11 महीने के किरायानामे पर कितना स्टाम्प लगता है?

तय ₹500, किराया चाहे जितना हो। एक साल से कम अवधि वाली पंक्ति में यह तय शुल्क है, प्रतिशत नहीं। पंजीयन वैकल्पिक है।

किरायानामा पंजीबद्ध कराने पर कितना लगेगा?

पंजीयन शुल्क स्टाम्प शुल्क का तीन-चौथाई होता है, पर कम से कम ₹1,000। ₹500 का तीन-चौथाई ₹375 बनता है, इसलिए न्यूनतम ₹1,000 ही लगेगा — कुल ₹1,500।

क्या किरायानामा पंजीबद्ध कराना ज़रूरी है?

एक साल से कम की अवधि पर नहीं। एक साल या उससे ज़्यादा पर अनिवार्य है। बैंक, GST रजिस्ट्रेशन या पते के प्रमाण के लिए पंजीबद्ध प्रति अलग से माँगी जा सकती है, भले अवधि कम हो।

लंबी अवधि के पट्टे पर कितना लगेगा?

1 से 5 साल पर 0.1%, 5 से 10 साल पर 0.5%, 10 से 20 साल पर 1%, और 20 से 30 साल पर 2% — पूरी अवधि के किराये और अग्रिम पर। न्यूनतम स्टाम्प ₹500 है और पंजीयन अनिवार्य।

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