किरायानामा क्या है
किरायानामा मकान-मालिक और किरायेदार के बीच का लिखित करार है — किराया कितना, कब तक, जमा राशि कितनी, और कौन क्या मरम्मत कराएगा। विभाग की सूची में यह "पट्टा" (lease) की श्रेणी में आता है, इसलिए इस पर स्टाम्प शुल्क लगता है।
ग्यारह महीने का ही क्यों? क्योंकि एक साल से कम अवधि पर पंजीयन अनिवार्य नहीं है। एक साल या उससे ज़्यादा का करार पंजीबद्ध कराना पड़ता है, और स्टाम्प भी अवधि के हिसाब से बढ़ जाता है। यही वजह है कि पूरे देश में किरायानामा ग्यारह महीने का बनता है।
किरायानामा कैसे बनता है
- तय कीजिए — किराया, अवधि, जमा राशि (सिक्योरिटी), बिजली-पानी का बिल कौन भरेगा, और नोटिस की अवधि।
- दोनों पक्षों के आधार, और मकान का पता व संपत्ति की पहचान तैयार रखिए।
- ई-स्टाम्प SAMPADA 2.0 से बनवाइए — ग्यारह महीने के लिए तय ₹500 का।
- करार उसी स्टाम्प पर छपवाइए, दोनों पक्ष और दो गवाह हस्ताक्षर करें।
- पंजीयन कराना हो — बैंक, GST या पते के प्रमाण के लिए अक्सर माँगा जाता है — तो उप-पंजीयक कार्यालय में स्लॉट लेकर कराइए।
GST रजिस्ट्रेशन के लिए किरायानामा
कारोबार का पता किराये की जगह पर हो, तो GST रजिस्ट्रेशन में जगह के प्रमाण के तौर पर किरायानामा लगता है, साथ में मकान-मालिक का बिजली बिल या संपत्ति कर रसीद। कई मामलों में पंजीबद्ध किरायानामा माँगा जाता है — तब स्टाम्प ₹500 के ऊपर पंजीयन शुल्क ₹1,000 और लगेगा। अपनी ज़रूरत पहले अपने कर सलाहकार से पक्की कर लीजिए; GST की शर्तें हमारा विषय नहीं हैं।
किरायानामे में क्या-क्या लिखा होना चाहिए
- दोनों पक्षों के पूरे नाम, पते और पहचान
- संपत्ति का पूरा पता और जो हिस्सा किराये पर है
- मासिक किराया, बढ़ोतरी की शर्त, और भुगतान की तारीख़
- जमा राशि और वह कब-कैसे लौटेगी
- अवधि, और दोनों तरफ़ से नोटिस की शर्त
- बिजली, पानी, रख-रखाव और मरम्मत किसकी ज़िम्मेदारी
- दो गवाहों के हस्ताक्षर
यह सरकारी वेबसाइट नहीं है
Registry99 एक निजी वेबसाइट है। हम पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग नहीं हैं, न हमारा उससे कोई संबंध है। हम न स्लॉट बुक कर सकते हैं, न ई-स्टाम्प जारी कर सकते हैं, न दस्तावेज़ पंजीबद्ध कर सकते हैं। यहाँ दिए आँकड़े विभाग के प्रकाशित स्रोतों से लिए गए हैं और आपकी जानकारी के लिए हैं। भुगतान से पहले SAMPADA 2.0 या उप-पंजीयक कार्यालय से रकम की पुष्टि ज़रूर कीजिए।